हमारे अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि १९७९ से रात्रिकालीन तापमान में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है।
हमने १९७९ से आईएमडी द्वारा उपलब्ध कराए गए उत्तर प्रदेश के तापमान के आंकड़ों का अध्ययन किया ताकि यह जाना जा सके कि प्रदेश में तापमान के परिवर्तन का चरित्र क्या रहा है। यह अध्ययन न केवल तापमान में परिवर्तन को समझने के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि इसके नतीजे तापमान में परिवर्तन के मानव जीवन पर पड़ने वाले ऋणात्मक प्रभावों को न्यूनतम करने के लिए नीति निर्माण में भी उपयोगी हैं। हमारे अध्ययन के नतीजे ये दिखाते हैं कि अध्ययन अवधि में दिन का तापमान कमोबेश स्थिर रहा है या इसमें मामूली कमी आई है। मौसम विज्ञान के शोध इसका कारण एरोसोल उत्सर्जन में वृद्धि होना है। एयरोसोल उत्सर्जन उद्योगों, वाहनों के धुवें से होता है और गर्मी के मौसम में एयरोसोल विकिरण को बाधित करता है जिससे तापमान में गिरावट का कारण माना जाता है। हमारे अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि १९७९ से रात्रिकालीन तापमान में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। परिणाम यह बताते हैं कि रात्रिकालीन तापमान ५ प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से अध्ययन अवधि के दौरान बढ़ा है। मजेदार तथ्य यह है कि रात्रिकालीन औसत तापमान में यह वृद्धि गर्मी के महीनों में नहीं बल्कि अन्य महीनों में हुई है जिसका निष्कर्ष यह है कि सर्दी का मौसम सिकुड़ रहा है जबकि गर्मी का मौसम फ़ैल रहा है। स्पष्ट है कि सर्दियों के सिकुड़ने का कृषि, ऊर्जा खपत और मानवीय स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव है और नीति निर्माण में इन प्रभावों को दृष्टिगत रखना संपोषित विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन से संबंधित ऐसे मजेदार तथ्यों को जानने के लिए हमारे ब्लॉग पोस्ट से जुड़े रहें।
